दोस्ती(Dosti)

जीवन में जिसे सच्चा मित्र मिल गया-समझो सब-कुछ मिल गया.उन सभी दोस्तों के लिए जिनको ऎसा मित्र मिल गया हॆ या जो उसकी तलाश में हॆं

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सभी बुड्ढे हुए जवान, इस होली में-Holi Contest

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क्यों सोता चद्दर तान ,इस होली में?

सभी बुड्ढे हुए जवान, इस होली में

बाहर निकल कर देख जरा तू

क्यों बॆठा हॆ अपनी ही खोली में ?

किसने किसको कब,क्या बोला ?

मत रख अब तू ध्यान, इस होली में

खट्टा-कडवा ,अब कब तक बोलेगा?

मिश्री-सी दे तू घोल, अपनी बोली में

माना की जीवन में दु:ख ही दु:ख हॆ

अपनी गठरी दे तू खोल,इस होली में

न हिन्दू,न मुस्लिम, ,न सिख,न ईसाई

सभी बने जाते इन्सान, इस होली में.



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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

baijnathpandey के द्वारा
April 1, 2011

परम आदरणीय श्री परासर जी खट्टा-कडवा ,अब कब तक बोलेगा? मिश्री-सी दे तू घोल, अपनी बोली में माना की जीवन में दु:ख ही दु:ख हॆ अपनी गठरी दे तू खोल,इस होली में…………….बहुत सटीक अभिव्यक्ति | इंसान को इंसान बने रहने की प्रेरणा देती हुई एक सार्थक पोस्ट | बधाई एवं शुभकामना |

    Jasemin के द्वारा
    June 14, 2011

    Posts like this brighten up my day. Thanks for tkanig the time.

rajkamal के द्वारा
March 31, 2011

आदरणीय विनोद जी ….सादर प्रणाम ! सभी बुड्ढे हुए है कुछ ऐसे जवान जैसे काली घोड़ी को लगी हो लाल लगाम …. जाग उठे है इनके सोए हुए अरमान करता हूँ मैं इनको लाल सलाम …. आदरणीय विनोद जी …. मुझको तैयार करने के लिए तो आपने एक ही लाइन कही थी लेकिन उस कविता को पूर्ण करने के बाद आप भी “जवानो” की फेरहिस्त में शामिल होने को चल दिए ….. कंटेस्ट के लिए शुभकामनाये

    Egypt के द्वारा
    June 14, 2011

    Haha. I woke up down today. You’ve ceheerd me up!

rajkamal के द्वारा
March 31, 2011

आदरणीय विनोद जी ….सादर प्रणाम ! सभी बुड्ढे हुए कुछ ऐसे जवान जैसे बूढी गोढ़ी को लाल लगाम ….. जागे है इनके सोये हुए अरमान करता हूँ इन सभी को लाल सलाम …. मुझको तो आपने सिर्फ एक लाइन सुना कर ही कंटेस्ट के लिए तैयार कर लिया था , और उसके बाद वोह कविता पूरी करने के बाद आप भी “जवानो” की फेरहिस्त में शामिल होने चल दिए ….. कंटेस्ट के लिए मुबारकबाद

allrounder के द्वारा
March 31, 2011

विनोद जी, सादर नमस्कार सभी बुड्ढों को जवान करती इस रंग बिरंगी रचना के लिए रंग विरंगा आभार ! होली कांटेस्ट के लिए हार्दिक शुभकामनायें !

abodhbaalak के द्वारा
March 31, 2011

विनोद जी शरीर बूढा होता है, मन थोड़ी न……………………….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

आर.एन. शाही के द्वारा
March 31, 2011

श्रद्धेय विनोद जी, आपने अपनी लाइनों में होली के साथ सामाजिक सौहार्द्र को जोड़ कर बड़ा भला काम किया, लेकिन होली के साथ चोली की भी एक लाइन मिला देते तो क्या बात थी ! बधाई ।

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 31, 2011

माना की जीवन में दु:ख ही दु:ख हॆ अपनी गठरी दे तू खोल,इस होली में न हिन्दू,न मुस्लिम, ,न सिख,न ईसाई सभी बने जाते इन्सान, इस होली में. कितनी उदार अभिव्यक्ति |,खूब सूरत अंदाज | जाते जाते बर्षा गया ये रंग भी इस बार | बधाई

    Lesa के द्वारा
    June 14, 2011

    You’re the one with the brains here. I’m watichng for your posts.


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