दोस्ती(Dosti)

जीवन में जिसे सच्चा मित्र मिल गया-समझो सब-कुछ मिल गया.उन सभी दोस्तों के लिए जिनको ऎसा मित्र मिल गया हॆ या जो उसकी तलाश में हॆं

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तब ऒर अब-Velintine Contest

Posted On: 13 Feb, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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images (11)तब तुम थे
लगता-
मॆं हूं
तुम हो
ऒर कुछ भी नहीं।
साक्षी हॆ-
गांव के बहार खडा
वह बरगद का पेड
हमारी मलाकातों का
जिसके नीचे बॆठ
तपती दोपहरी में

images (11)हम-

भविष्य के सुनहरे स्वपन बुनते थे।
तुम!
चले गये
दुःख हुआ।
लेकिन-
तुम्हारे जाने के बाद
आ गया कोई ऒर
अब-
लगता हॆ-
मॆं हूं
वह हॆ
ऒर कुछ भी नहीं।
नाटक का सिर्फ
एक पात्र बदला हॆ
बाकि-
वही-मॆं
गांव, बरगद का पेड
तपती दोपहरी
ऒर-
भविष्य के सुनहरे सपने।

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Gertie के द्वारा
June 14, 2011

Now that’s sblute! Great to hear from you.

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 14, 2011

विनोद जी…. नमस्कार…. सुंदर भावों से सजी आपकी रचना…. आभार… एक दृष्टि इधर भी डालियेगा http://himanshudsp.jagranjunction.com/2011/02/11/love-5/

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 14, 2011

क्या बात है बहुत ही खुबसूरत भाव लिए हुए रचना … नाटक का सिर्फ एक पात्र बदला हॆ बाकि- वही-मॆं गांव, बरगद का पेड तपती दोपहरी ऒर- भविष्य के सुनहरे सपने।.. बहुत सुन्दर

    February 14, 2011

    निखिल जी, यह जीवन का कठोर सत्य हॆ-यह बात अलग हॆ कि कुछ लोग इस सत्य को स्वीकार नहीं करते ऒर जीवन भर दुंखी रहते हॆं.आपने मेरा उत्साह बढाया.धन्यवाद!

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 13, 2011

आदरणीय विनोद जी…….बहुत सुंदर रचना ….. हार्दिक बधाई…

    February 13, 2011

    पियूष भाई आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!

    Julissa के द्वारा
    June 14, 2011

    That’s 2 cleevr by half and 2×2 clever 4 me. Thanks!

Tufail A. Siddequi के द्वारा
February 13, 2011

विनोद जी अभिवादन, बहुत सुन्दर रचना. बधाई.

    February 13, 2011

    धन्यवाद! सिद्द्की जी.

    Forever के द्वारा
    June 14, 2011

    Your answer was just what I ndeeed. It’s made my day!

Bhagwan Babu के द्वारा
February 13, 2011

विनोद जी अच्छा लेख है एक खुबसूरत चित्रण करता हुआ http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/13/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%88-%e2%80%93-valentine-contest/

    February 13, 2011

    भगवान बाबू यह लेख नहीं कविता हॆ.लेख व कविता में फर्क होता हॆ.उत्साह-वर्धन के लिए धन्यवाद! कृपया मेरी टिप्पणी को अन्यथा न लेना.

vinitashukla के द्वारा
February 13, 2011

सच है विनोद जी, जीवन किसी के लिए नहीं ठहरता. इस भाव को बड़ी खूबसूरती से आपकी इस कविता में अभिव्यक्त किया गया है. बधाई.

    February 13, 2011

    विनिता जी, जीवन-चलने का नाम हॆ.ठहराव का नहीं.कविता पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार.

    Kristy के द्वारा
    June 14, 2011

    Kewl you should come up with that. Eexcllent!

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 13, 2011

आदरणीय पाराशर जी, बहुत सुन्दर उदगार हैं आपके|

    February 13, 2011

    वाहिद जी कविता में व्यक्त उदगार आपको अच्छे लगे. शुक्रिया.

    Trinity के द्वारा
    June 14, 2011

    I thank you humbly for sharing your wsiodm JJWY


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