दोस्ती(Dosti)

जीवन में जिसे सच्चा मित्र मिल गया-समझो सब-कुछ मिल गया.उन सभी दोस्तों के लिए जिनको ऎसा मित्र मिल गया हॆ या जो उसकी तलाश में हॆं

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कॆसे-कॆसे हादसे होने लगे हॆ आजकल ?

Posted On: 4 Feb, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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गजल
====
कॆसे-कॆसे हादसे, होने लगे हॆ आजकल
मल्लाह ही नाव को,डुबोने लगे हॆं आजकल.

जहरीली हवा हुई तो, दरखतों को दोष क्य़ों
माली खुद विष-बेल बोने लगे हॆं आजकल।

घर के पहरेदारों की मुस्तॆदी तो देखिए
चॊखट पे सिर रखकर सोने लगे हॆं आजकल।

बंद मुट्ठियों के हॊसले जानते हॆं वो
उगलियों पर हमले होने लगे हॆं आजकल।

कल तक थे जो झुके-झुके से
तनकर खडे होने लगे हॆं आजकल।
*******



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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
February 14, 2011

बहुत सुंदर हकीकत बयानी है

    February 14, 2011

    भाई शिवेन्द्र जी! जहां रक्षक ही भक्षक बन जायें-वहां ऎसे ही हादसे हो सकते हॆं.आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए आभार.

    Lark के द्वारा
    June 14, 2011

    Thank God! Someone with birans speaks!

Tufail A. Siddequi के द्वारा
February 13, 2011

विनोद जी अभिवादन, वर्तमान सामाजिक वास्तविकता को लिए हुए बेहतरीन पंक्तियाँ. बधाई.

Dr S Shankar Singh के द्वारा
February 6, 2011

वास्तविकता का निरूपण करती अत्यंत सुन्दर कविता

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 5, 2011

आदरणीय पाराशर जी, बहुत अच्छे शब्दों में यथार्थ का चित्रण किया है आपने| आभार सहित,

Alka Gupta के द्वारा
February 5, 2011

पराशरजी , बहुत ही सत्य व बढ़िया रचना है आपकी !

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 5, 2011

आदरणीय विनोद जी……….. इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई…

rahulpriyadarshi के द्वारा
February 5, 2011

अत्यंत सुन्दर और सटीक व्यंग्य,यथार्थ भी है. रचना के लिए धन्यवाद.

    February 5, 2011

    भाई राहुल प्रियादर्शी जी, रचना आपको पसंद आई.अपनी प्रतिक्रिया से इसी तरह उत्साह बढाते रहें.आपका भी धन्यवाद!

    Jodi के द्वारा
    June 14, 2011

    Hey, that’s the gertaest! So with ll this brain power AWHFY?

rajkamal के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय विनोद जी …सादर अभिवादन ! इन चंद लाइनों में ही गज़ब ढा दिया है आपने …. वाकई में अद्भुत और लाजवाब , मन गार्डन * गार्डन हो गया …. बहुत ही तरपत मन से बधाई

    February 5, 2011

    भाई राजकमल जी, आपके मन रुपी गार्डन में इसी तरह से खुशियों के कमल खिलते रहेंगे.अपनी रचनाओं के माध्यम से खाद-पानी देने का प्रयास हम बराबर करते रहेंगें.’ बहुत ही तरपत मन से बधाई’-में ’तरपत’ शब्द से अभिप्राय-क्या ’तृप्त’ से हॆ? हॊसला बढाने के लिए आभार!

    Jenny के द्वारा
    June 14, 2011

    Wow, that’s a really celver way of thinking about it!

priyasingh के द्वारा
February 4, 2011

ज़हरीली हवा हुई तो दरख्तों को दोष क्यों मलो खुद विषबेल बोने लगे है आजकल ……………..उत्तम प्रस्तुति ……………


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