दोस्ती(Dosti)

जीवन में जिसे सच्चा मित्र मिल गया-समझो सब-कुछ मिल गया.उन सभी दोस्तों के लिए जिनको ऎसा मित्र मिल गया हॆ या जो उसकी तलाश में हॆं

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सॆट-अप ! य़ू इडियट !!

Posted On: 20 Jan, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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सॆट-अप ! य़ू इडियट !

मॆं ऒर मेरी धर्म-पत्नी, रात को लगभग 8-9 बजे के आस-पास,अक्सर घूमने जाते हें.रात को खाना खाने के बाद,पत्नी के साथ घूमने के कई फायदे हॆं.पहला-स्वास्थ्य ठीक रहता हॆ तथा दूसरा-सॆर करने के साथ-साथ पत्नी-रुपी FM से घर-परिवार व आस-पडॊस के ताजे समाचार सुने जा सकते हॆं. जॆसे-हमारी माताजी ने आज उनको किस बात पर ताना दिया? या पडॊसी गुप्ताजी के घर में आज कॊन-सी नयी चीज आई? आदि-आदि.
खॆर, अब मुद्दे की बात करें.हुआ य़ूं कि कल हम अपनी पत्नीजी के साथ, नाईट-वाक (यानी रात को खाना खाने के बाद वाली सॆर) पर थे. उनका FM चालू था.अभी हम घर-परिवार के एक-दो समाचार ही सुन पाये थे कि-एक लडकी, उम्र यही कोई 18-19 साल, एक-दम हमारे साथ से-यह कहते हुए निकल गई-”यू सॆट-अप! इडियट”
पत्नी ने अपना FM बंद कर दिया ऒर हमारा रिमान्ड लेना शुरू कर दिया.
एक-दम अंधे हो गये क्या?
इतना मोटा चश्मा लगा रखा हॆ,फिर भी दिखाई नहीं देता?
“कसस से,मॆनें कुछ भी नहीं किया” मॆनें पत्नी को सफाई देने की कॊशिश दी.
दो बच्चों के बाप हो गये,लेकिन अभी तक सड्क पर चलना नहीं आया. भगवान जाने कब अक्ल आयेगी?
“विश्वास करो, मेरा हाथ तक उससे टच नहीं हुआ”-मॆंने फिर सफाई दी.
हाथ टच नहीं हुआ! तो ’इडियट’ क्या वॆसे ही, फ्री में कह गय़ी?
“यही तो मेरी समझ में नहीं आ रहा हॆ”. मॆंने शंका जाहिर की.
वह लडकी अभी भी, हमसे 10-15 कदम की दूरी पर आगे-आगे चल रही थी.
तभी-अचानक वह खिल-खिलाकर हंसी.
“अच्छा! बाय! अब कल बात करुंगी” उस लड्की ने किसी से कहा.लेकिन हमारे अलावा उसके आस-पास कोई भी नजर नहीं आ रहा था.मॆंने मन ही मन सोचा-कहीं यह लड्की पागल तो नहीं हॆ? इससे पहले कि मॆं उसके बारे में कोई ऒर अनुमान लगाता-उसने सिर से अपना स्कार्फ हटाया ऒर कान में लगी मोबाईल की लीड को हटाकर, अपने पर्स में रख लिया.
वाकई! उस लड्की के मोबाईल ने, हम दोनों को ’इडियट’ ही तो बना दिया.
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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kaed के द्वारा
June 14, 2011

There’s a screet about your post. ICTYBTIHTKY

abodhbaalak के द्वारा
January 24, 2011

आज से लगभग दस साल पहले जब पहली बार मैंने एक युवक को ऐसे ही बिना किसी …. के बात करते सुना तो मै समझ नहीं पाया थी की ये बात किस से कर रहा है… पर आज विज्ञानं ने इतनी …. मज़ेदार प्रसंग विनोद जी… पढ़ कर मज़ा आ गया.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    विनोद पाराशर के द्वारा
    January 24, 2011

    धन्यवाद! अबोध जी, चलो! इसी बहाने आपकी पुरानी यादें ,ताजा हो गयीं.धन्यवाद!

allrounder के द्वारा
January 21, 2011

विनोद जी, नमस्कार अक्सर इस प्रकार से बात करते हुए किसी को देख कर धोखा हो जाता है, मगर धोखे की सजा आपको उठानी पड़ी ये बड़ी गड़बड़ बात हुई ! एक अच्छी रचना पर बधाई !

    January 21, 2011

    भाई सचिन जी, इस प्रसंग से अब तो आप को भी पता लग गया होगा कि हमारी पत्नी हमारा कितना सम्मान करती हॆ? अब यह बात अलग हॆ कि कुछ लोग अपने सुख-दु:ख, मित्रों के साथ नहीं बांटते.भाई हमारा तो मानना हॆ कि-भला दोस्तों से क्या छुपाना? आपकी सहानुभूतिपूर्ण टिप्पणी के लिए-धन्यवाद!

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 21, 2011

आधुनिक तकनीक के जलवे कभी कभी ऐसे दृष्टान्त भी प्रस्तुत करते हैं|

    January 21, 2011

    वाहिद जी, वाकई! कभी कभी तो बडे ही रोचक नजारे देखने को मिलते हॆं.आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया.

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 21, 2011

विनोद जी अबिह्वादन, रोचक पोस्ट, बधाई.

    January 21, 2011

    सिद्द्की जी. आपको रचना पढकर,आनंद आया,मेरा प्रयास सफल रहा.धन्यवाद!

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 21, 2011

बहुत बढ़िया…………. घटना….. क्या होता अगर आपको पता ही नहीं चल पाटा की वो मोबाइल पर बात कर रही थी…….. पहले जब मोबाइल शुरू में आया तो लोगों के लिए मोबाइल पर बात करते हुए देखना बड़ा अजीब अनुभव था मनो कोई पागल खुद चिल्ला रहा है…….. फिर जिसने भी कान के पास हाथ रख कर बोलना शुरू किया तो ये स्पष्ट होने लगा की वो मोबाइल पर बात कर रहा है……. पर पहले इयर फोन और फिर ब्लूटूथ ने दोनों हाथ लटकते हुए चलते आदमी को चिल्लाते देखने की आदत डलवा दी……. अब हाल ये है की यदि कोई पागल भी सड़क पर चिल्लाता हुए चले तो पहले नज़र उसके कान पर जाती है की कही कोई इअर फोन या ब्लूटूथ तो नहीं लगा रखा है……….. मजेदार घटना………..

    January 21, 2011

    पियूष जी, यह तो मेरा भाग्य अच्छा था,जो जल्दी ही पता लग गया ऒर श्रीमतीजी के सामने ही गलतफहमी दूर हो गयी वर्ना न जाने कब तक -घर में हमारा हुक्का-पानी बंद रहता.आधुनिक तकनीक ने मोबाईल में नयी नयी सुविधायें जोड दी हॆं.कई बार तो पता ही लगता पडॊसी मोबाईल पर बात कर रहा हॆ या किसी भूत-प्रेत से बतिया रहा हॆ.

    Brandice के द्वारा
    June 14, 2011

    This has made my day. I wish all potnsigs were this good.

rajkamal के द्वारा
January 20, 2011

उनका एक हाथ अक्सर अपने कान पर रहता है हम तों यही समझते थे की उनको कोई कर्ण रोग हो गया है लेकिन अब पता चला है की उनके कान पे हमेशा मोबाइल लगा रहता है ….. आदरणीय विनोद जी …. सादर प्रणाम ! जब जवानी का समय होता है तों बंद कमरे में “बहनों का प्रोग्राम” सुना करते थे ….. लेकिन अब बुढापे में सरे राह चलते -२ बंद कमरे वाला काम करेंगे तों ऐसी फजीहत तों होगी ही …. आपकी आपबीती से शायद किसी को कोई नसीहत मिल जाये की समाजिक नियम + कायदे और मर्यादाये भी निभाने के लिए होती है …. धन्यवाद

    January 21, 2011

    भईया राजकमल जी, अब भाईयों से क्या छुपाना.अफसोस तो इस बात का कि बिना कुछ टच हुए ही,आपकी भाभी श्री ने हमारा रिमाण्ड ले लिया.चलो अच्छा हॆ-अगर बडों की गलती से छोटे कुछ सबक ले सकें.अपने विचारों से अवगत करवाने के लिए ,आपका धन्यवाद!


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