दोस्ती(Dosti)

जीवन में जिसे सच्चा मित्र मिल गया-समझो सब-कुछ मिल गया.उन सभी दोस्तों के लिए जिनको ऎसा मित्र मिल गया हॆ या जो उसकी तलाश में हॆं

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कुत्ते

Posted On: 14 Jan, 2011 में

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कुछ कुत्ते-

कुत्ते होते हॆं.

कुछ कुत्ते-

कुत्ते होते हुए भी

कुत्ते नहीं-

कुछ ओर होते हॆं.

मेरे मॊहल्ले में-

कई कुत्ते हॆं.

पहला-भॊंकता हॆ

दूसरा-काटता हॆ

तीसरा-भॊंककर

काटता हॆ

चॊथा-पेशेवर हॆ

हड्डी चाटता हॆ

कटवाने पर

काटता हे.

कभी कभी-

गुस्से में आ जाता हॆ

हड्डी के चक्कर में

खुद को काट खाता हॆ.

**************



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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
August 26, 2012

शानदार प्रस्तुति

SUMIT PRATAP SINGH के द्वारा
January 20, 2011

विनोद जी कुत्तों के कुत्तेपन का क्या खूब वर्णन कर डाला…. http://www.sumitketadke-1.blogspot.com

    January 20, 2011

    सुमित जी, आखिर! कुत्तॊं में भी कुछ न कुछ तो हॆ, जो कलम चलाने के लिए मजबूर कर दिया.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 16, 2011

सही बात …….. ये सारी खूबियाँ आदमी की है हैं ओर बदनाम वफादार कुत्ता है…………….

    January 17, 2011

    भाई पंत जी. आदमी के मनोविज्ञान से आप ज्यादा परिचित हॆं-इसलिए आपकी राय सिर-माथे पर.बस यह बात किसी आदमी को मत बता देना,न जाने कब बुरा मान जाये.आगे आपकी मर्जी.

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 16, 2011

Vinod Parashar Ji Abhivadan, ‘Kutte’ par Badhai swikaar karen.

roshni के द्वारा
January 16, 2011

विनोद पराशर जी नमस्कार कविता कुते को संबोधित करते हुए भी इंसान के सवभाव को बयाँ कर गयी है ……….. बहुत ही बढ़िया कविता

    January 16, 2011

    रोशनी जी, जब भी कोई कविता पोस्ट करता हूं,न जाने क्यूं आपकी टिप्पणी के बिना कुछ अधूरा-सा लगता हॆ.आपकी तरह से रोशनी की किरन आई तो लगा-अब कुछ उजाला हुआ.जानवरों के बहाने ही सही,इंसान शायद कुछ समझ जाये.उत्साह बढाने के लिए धन्यवाद!

Deepak Sahu के द्वारा
January 16, 2011

क्या बात है महोदय जी! कुत्तों पर कविता लिख डाली और हमें हंसने को मजबूर कर दिया! अच्छी कविता! दीपक http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/

    January 16, 2011

    दीपक जी, कविता तो साहित्य की वह विधा हॆ जो निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन खोज लेती हॆ,कुत्ता तो फिर भी बहुत ही स्वामिभक्त व संतोषी जीव हॆ.आपको कविता अच्छी लगी.धन्यवाद!

abodhbaalak के द्वारा
January 15, 2011

samjhne का प्रयास कर रहा हूँ की आप kutton की hi baat कर rahe hain yaa……. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    January 15, 2011

    अबॊध जी, एक पंजाबी की कहावत हॆ कि’कहवे धी नू,ते समझावे नूउ नू’ अर्थात कहना-’बेटी को ऒर समझाना बहू को’..अब इससे ज्यादा ऒर क्या कहूं? इस तरह की कविताओं के बारे में-हास्य कवि’घायल’, कुमारी रसवंती के साथ अपने एक इन्टरव्यू में पहले ही बहुत कुछ कह चुके हॆं.इस तरह से उत्साह बढाते रहे-ऒर जानवरों को भी जागरण जंकशन पर ले आऊंगा.

nishamittal के द्वारा
January 15, 2011

चलिए गली के कुत्तों की चिंता करने वाला कोई तो है सर्दी में ठिठुरते एक दुसरे से उष्णता लेने के लिए छोटा सा समूह बनाकर बैठते शायद अपने परिवार के साथ.,सच तरस आता है.

    January 15, 2011

    निशा जी, स्वामी-भक्ति आजकल इन्सान में तो बची नहीं,यही एक जानवर हॆ जिससे यदि चाहे तो आदमी सीख सकता हॆ.आपकी प्रतिक्रिया मिली.धन्यवाद!

rajkamal के द्वारा
January 14, 2011

आदरणीय विनोद जी ….. सादर अभिवादन ! आपकी कुत्तों पर यह छोटी सी कविता तो बेहद मजेदार निकली

    January 14, 2011

    भाई राजकमल जी, मॆं भी पिछ्ले कुछ दिनों से देख रहा था कि कोई अपनी प्यारी जूली पर लेख लिख रहा हॆ तो कोई अपने टोमी को घर पर रखने के लिए अपने बुजुर्ग बाप को घर से बाहर का रास्ता दिखा रहा हॆ.आखिर मुझसे भी रहा नहीं गया इसलिए अपनी गली के कुत्तों को ही जागरण जंक्शन पर लाकर खडा कर दिया.


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